डॉ. बी.आर आंबेडकर  को भारतीय संविधान के रचयिता के रूप में जाना जाता है. उन्होंने अपनी दूरदर्शिता की वजह से देश के लिए एक ऐसा संविधान तैयार किया जो सभी जाति और धर्म के लोगों की रक्षा करे. उनकी सोच और उनके व्यक्तित्व के पीछे उनके अपने सिद्धांत थे. जिन्होंने न सिर्फ उन्हें सफल इंसान बनाया  बल्कि हर ऊंचाई को छून में मदद भी की. आइए आज डॉ. बी.आर अंबेडकर की पुण्यतिथि के मौके पर उनके जीवन से जुड़ी

अहम बातों के बारे में जानें. यह बातें आपको भी अपने जीवन में सफलता दिला सकती हैं…

1. कुछ जानने की इच्छा:

डॉ.बी.आर आंबेडकर  बचपन से ही पढ़ने में अपने सहपाठियों की तुलना में काफी तेज थे. वह हर समय कुछ न कुछ नया जानने-सीखने को उतारू रहते थे. उनकी यही खासीयत आगे चलकर उनकी सफलता की कुंजी बनी.
आज के दौर में भी हम उनकी इस खूबी को अपने ऊपर लागू कर सकते हैं. ऐसा करने से आप भी नई चीजों से अपडेट रहेंगे और इसका फायदा आपको निकट भविष्य में जरूर मिलेगा.

2. समाज के प्रति अपनी जिम्मदारी का पता होना:

बाबा साहेब आंबेडकर को समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का हमेशा से पता होता था. वह चाहते थे कि वह समाज के लिए कुछ करें. ताकि उनके आसपास रहने वाले लोग बेहतर जीवन जी सकें. समाज के प्रति जिम्मेदारियों
का एहसास ही उन्हें खास  बनाता था. हम भी अपने स्तर पर अपने आसपास रहने वाले लोगों के लिए कुछ कर सकते हैं. भले ही इसकी शुरुआत हम किसी जरूरतमंद बच्चे को रोजाना पढ़ाने से ही क्यों न करें. आपका रोजाना
किया जाने वाला यह प्रयास एक दिन उस बच्चे के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है.

3. खुद पर विश्वास:

बाबा साहेब अपने आप पर सबसे ज्यादा विश्वास करने वाले लोगों में से थे. यही वजह थी कि उन्हें अपने ज्यादातर फैसलों पर निराशा हाथ नहीं  लगी. उन्होंने जो भी काम करने की सोची उसे विश्वास के साथ पूरा किया. आप और हम भी खुदपर भरोसा करके कई बड़े काम को सही तरह से कर सकते हैं. खुद पर भरोसा आपको भी अपने काम को सही तरह से करने की ताकत देगा.

4.सबको साथ लेकर चलें:

आपकी तरक्की में सभी का साथ होता है. यह बात बाबा साहेब से बेहतर तरीके से कोई नहीं समझा सकता. बाबा साहेब का सभी धर्म, जाति और नस्ल के लोगों के प्रति एक तरह का ही व्यवहार था. वह किसी के साथ भेदभाद
नहीं करते थे. उनकी यही खूबी उन्हें सभी का चहेता भी बनाती थी. हम और आप भी उनकी इस खूबी को अपने जीवन में शामिल कर सकते हैं.

5. दूरदर्शी होना:

एक सफल व्यक्ति के लिए दूरदर्शी होना जरूरी है. आपको पता होना चाहिए कि आप भविष्य में क्या और कैसे करने वाले हैं और उसका आपके जीवन पर क्या प्रभाव होने वाला है. भीम राव अंबेडकर भी दूरदर्शी थे. वह अपने
द्वारा किए गए फैसले और उसके असर के बारे में पहले से ही वाकिफ होते थे.

👇 भीमराव आंबेडकर के जीवन से जुड़े अन्य रोचक तथ्य 👇

1. 14 अप्रैल 1891, के दिन मध्यप्रदेश के महू गांव में रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई के घर चौदहवीं और आखिरी संतान पैदा हुई थी. नाम रखा गया ‘भीमराव अंबाडवेकर’ जो समय के साथ-साथ ‘बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेडकर’ बन गया.

2. अंबेडकर की शादी 1906 में नौ साल की रमाबाई से हुई थी. 1908 में वे एलफिंस्टन कॉलेज में दाखिला लेने वाले पहले दलित बच्चे बनें.

3. भीमराव अंबेडकर करीब 9 भाषाएँ जानते थे. उन्होनें 21 साल तक लगभग सभी धर्मों की पढ़ाई भी की थी.

4. भीमराव अम्बेडकर के पास कुल 32 डिग्री थी. वो विदेश जाकर अर्थशास्त्र में P.H.D. करने वाले पहले भारतीय थे. नोबेल प्राइज जीतने वाले अमर्त्य सेन अर्थशास्त्र में इन्हें अपना पिता मानते थे.

5. बी आर अंबेडकर पेशे से वकील थे. वो 2 साल तक मुंबई के सरकारी लाॅ काॅलेज में प्रिंसिपल भी बनें.

7. आजकल फैक्ट्रियों में 8 घंटे काम होता है ये सब Bhimrao Ambedkar की ही देन है. इससे पहले 12-14 घंटे काम करना पड़ता था.

8. भीमराव अंबेडकर संविधान निर्माण करने वाली समिति के अध्यक्ष थे. इसलिए इनको संविधान का निर्माता कहा जाता है.

9. बाबासाहेब ने 50 के दशक में कहा था कि बिहार और मध्यप्रदेश का विभाजन कर दो. उस समय उनकी किसी ने नही सुनी. फिर सन् 2000 में विभाजन करना पड़ा और नए राज्य झारखंड व छतीसगढ़ बनें.

10. अम्बेडकर ने 1956 में अपना धर्म बदलकर बौद्ध धर्म अपना लिया था. जिसके कारण, उनके साथ लाखों दलितों ने ऐसा किया.

11. दरअसल, देश में आरक्षण की शुरूआत अंबेडकर ने नही बल्कि कोल्हापुर के महाराजा छत्रपति साहूजी महाराज ने 1901 में पिछड़े वर्ग से गरीबी दूर करने के लिए की थी. उसके बाद ये चलता रहा और 1943 में अंबेडकर ने नेशनल लेवल पर अनुसूचित जातियों के लिए सरकारी नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण की मांग की. ये सपना पूरा हुआ अंबेडकर के संविधान समिती का अध्यक्ष बनने के बाद. शुरूआत में सिर्फ 10 साल के लिए आरक्षण दिया गया. लेकिन उसके बाद से इसे बढ़ाया ही जा रहा है.

12 मौत के 34 सालों बाद 1990 में आंबेडकर को भारत का सबसे बड़ा पुरस्कार भारत रत्न दिया गया.

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