शिव का वरदान

द्रौपदी अपने पिछले जन्म में एक महत्वाकांक्षी महिला थी। पाँच पांडव की पत्नी, द्रौपदी तब पैदा हुई जब द्रुपद ने द्रोण से बदला लेने के लिए यज्ञ किया। उसने शिव से प्रार्थना की कि वह अपने पति में चौदह वांछित गुण चाहती है। शिव जी ने कहा कि एक व्यक्ति में इतने अधिक गुण मिलना संभव नही है। पर द्रौपदी अपनी जिद पर अड़ी रही और आखिरकार शिव ने वरदान दे दिया कि उसके अगले जन्म में उसे ये सारे गुण चौदह पतियों में मिलेंगे। ये वरदान उसे पिछले जन्म में मिला था। शिव ने वादा किया था कि वह हर सुबह जब वह स्नान करगी, तब वह अपने कौमार्य को फिर से हासिल कर लेगी, यह भगवान शिव का वरदान था। इस प्रकार, शिव के वरदान की वजह से उसमें पूरी जिंदगी कुंवारी रहने की उनकी अनूठी गुणवत्ता थी। उसे ये सारे गुण पाँच पांडवों में मिल गए और इसलिए उसे चौदह शादियाँ नहीं करनी पड़ी।

पाँच चक्र

द्रौपदी मानव शरीर के पांच चक्रों के बंधन का प्रतीक है, इसलिए उसे कुला कुंडलिनी कहा जाता है जो मानव शरीर की रीढ़ की हड्डी में रहती है।

संयुक्त देवी

नारद पुराण और वायु पुराण के अनुसार, द्रौपदी देवी श्यामला (धर्म की पत्नी) का समग्र अवतार है, भारती (वायु की पत्नी), शची (इंद्र की पत्नी), इशा (अश्विन की पत्नी) और पार्वती (शिव की पत्नी)।

महाभारत युद्ध के बीज उसके द्वारा बोए गए

ऐसा कहा जाता है कि द्रौपदी ने दुर्योधन के बारे में कहा कि, “अंधे का बेटा भी अंधा” ऐसा तब हुआ जब दुर्योधन इंद्रप्रस्थ के शानदार महल, माया सभा,  में फिसल गया था।

परिवार

द्रौपदी ने पांच पांडवों के पांच बेटों को जन्म दिया। प्रतिबिन्ध (युधिष्ठिर का बेटा), सत्सुमा (भीम का पुत्र), शृक्तकर्ति (अर्जुन का पुत्र), सैतानिका (नकुल का बेटा), श्रुतिसेना (सहदेव का बेटा), उसके सभी बेटे अस्वथम्मा के हाथों मारे गए

करुण एवं विशाल हृदय

द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा ने मध्य रात्रि में सो रहे द्रौपदी के 5 पुत्रों की बेरहमी से हत्या कर दी। कृष्ण, अर्जुन और भीम गए और उन्होंने अश्वत्थामा को पकड़ लिया और उन्हें अंतिम निर्णय लेने के लिए द्रौपदी के पास लाये। हालांकि द्रौपदी ने, करुणा की एक अद्भुत भावना को दिखाया जब अश्वत्थामा अपने सिर को नीचे करके सज़ा पाने के लिए बैठ गया। हालांकि कृष्णा ने उन्हें बताया कि इस तरह के खूनी हत्यारे को मारने में कोई पाप नहीं था, द्रौपदी द्रोण की पत्नी के बेटे को खोने के दर्द को महसूस कर सकती थी। वह उसे निर्दोषी बोलकर जाने देती है।

द्रौपदी का घटोत्कच को अभिशाप

द्रौपदी ने घटोत्कच को एक भयानक अभिशाप दिया कि उसकी उम्र कम होगी और वो बिना किसी युद्ध में लड़े मारा जाएगा, जो कि एक छत्रिये के लिए भयंकर और शर्मनाक चीज थी। हिडिम्बा(भीम की पत्नी/घटोत्कच की माँ)अपने आप को नियंत्रित नहीं कर पायीं जब उन्होंने द्रौपदी का अभिशाप सुना। वह द्रौपदी के पास गयीं, और उसे एक नीच, पापी औरत कहा। अपने क्रोध में हिडिम्बा ने द्रौपदी के बच्चों को शाप दिया और दोनों रानियों ने लगभग पांडव वंश का नाश कर डाला।

द्रौपदी का बचाव

केवल दो कौरवों ने द्रौपदी के समर्थन में विरोध किया था जबकि अदालत के कमरे में उसे निर्वस्त्र किया गया था। विकार और यूयुत्सु। युयुत्सु सबसे ज्ञानी कौरव था और पांडवों और द्रौपदी की गुप्त रूप से प्रशंसा किया करता था। वो बाद में पांडव सेना में सम्मलित हो गया।

द्रौपदी अर्जुन को सबसे अधिक प्यार करती थी

जब पांडव स्वर्ग जाने के लिए अंतिम पथ पर थे तो द्रौपदी हिमालय से गिरने वाली पहली थी। जब भीम ने युधिष्ठिर से पूछा कि वो क्यों गिरी तो युधिष्ठिर ने जवाब दिया, “हालांकि वह हम(पाँचो पांडव)सभी को समान रूप से प्यार करने वाली थी, पर उसने पार्थ (अर्जुन) का समर्थन किया।” उसके पूरे जीवन में यही एक दोष था।

महा काली का अवतार

दक्षिण भारत में लोकप्रिय मान्यता है कि द्रौपदी महा काली का अवतार थी, जो भगवान कृष्ण की सहायता के लिए पैदा हुए थी (जो भगवान विष्णु का एक अवतार है, जो देवी पार्वती के भाई हैं) भारत के सभी अभिमानी राजाओं को नष्ट करने के लिए।

द्रौपदी के पांच नाम

द्रौपदी को पांचाली (अर्थात पांचाल राज्य की), यज्ञसेनी (अर्थात यज्ञ या आहुति से उत्पन्न), महाभारती (भारत के पांच महान वंशजों की पत्नी) और सैरंध्री इन पांच नामों से भी जाना जाता था।

कुत्तों को दिया था श्राप

पांडवों से विवाह के बाद वे सभी इस बात पर सहमत हुए थे कि एक समय में केवल एक भाई ही द्रौपदी के कक्ष में जा सकेगा, अन्य और कोई नहीं और जाने से पहले वह अपने जूते दरवाज़े पर रख देगा। जूतों से यह पता रहेगा कि कक्ष में पहले ही कोई है। एक दिन युधिष्ठिर द्रौपदी के साथ कक्ष में थे और तभी एक कुत्ता दरवाज़े के बाहर से उनके जूते चुरा ले गया।

इस बात से अनजान अर्जुन कक्ष में प्रवेश कर गए और उन्होंने युधिष्ठिर को द्रौपदी के साथ देख लिया। द्रौपदी को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई और उसने क्रोध में आकर जूते चुराने वाले कुत्ते को यह श्राप दे दिया, “सारी शर्म को भूलकर सारा संसार तुम्हें सार्वजनिक रूप से मैथुन करते हुए देखेगा”।

ऋषि दुर्वासा ने बचाया था

चीर हरण के समय ऋषि दुर्वासा के एक वरदान ने द्रौपदी की रक्षा की थी। एक बार गंगा में स्नान करते वक्त ऋषि दुर्वासा की लंगोटी गंगा नदी में बह गई। तब द्रौपदी ने अपने वस्त्र का एक कपड़ा फाड़कर उन्हें ढांकने के लिए दिया। इसीलिए ऋषि ने उसे कपड़े की एक न अंत होने वाली पट्टी का वरदान दिया था। जब दुशासन ने द्रौपदी का चीर हरण किया, उसी वरदान ने द्रौपदी की रक्षा की थी।

द्रौपदी की शर्त

द्रौपदी ने पांचों पांडवों की पत्नी बनने के बाद यह शर्त रखी थी कि वह अपना राज्य किसी अन्य स्त्री के साथ नहीं बांटेगी, पांडव अपनी अन्य पत्नियों को इंद्रप्रस्थ नहीं ला सकते थे। लेकिन अर्जुन कृष्ण जी की सलाह पर अपनी पत्नी सुभद्रा को वहां लाने में सफल हुए थे।

द्रौपदी के स्वयंवर में दुर्योधन ने नहीं लिया था सहभाग

द्रौपदी के स्वयंवर से पहले ही दुर्योधन का विवाह कलिंग की राजकुमारी भानुमति से हो चुका था। दुर्योधन ने भानुमति को यह वचन दिया था कि उसके इलावा वह किसी और को अपनी पत्नी नहीं बनाएगा और उसने इस वचन को निभाया। इसीलिए दुर्योधन ने द्रौपदी के स्वयंवर में सहभाग नहीं लिया था।

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