कुछ  लोग कहते हैं कि यहनागमणि एक नाग के पास होती है और वे नाग नागिन इच्छाधारी होते है और जो चाहे कर सकते हैं जबकि विज्ञान इस बात को साफ इनकार करता है की सांप के पास ऐसी कोई चीज नहीं होती है तो फिर क्यों और किसने इस कहानी को बनाया?

चलिए इसके सच को जानने से पहले थोड़ा विज्ञान की तरफ से भी जान लेते हैं कि क्यों विज्ञान इसको गलत मानता है और फिर जानेंगे कि यह कहानी सच कैसे है?

नागमणि का इतिहास:

विज्ञान कहता है कि किसी सांप के पास ऐसी कोई मणि जैसी चीज नहीं होती है क्योंकि आज तक किसी भी सांप के पास यह पाई नहीं गई है और यह सांप के मुंह में आएगी भी कहां से क्योंकि ना तो उसके मुंह में ऐसी कोई जगह खाली होती है जहां पर यह समय के साथ पैदा हो सकें और एक सांप की उम्र भी लगभग 40 से 50 साल मैक्सिमम होती है लेकिन कोई  100 साल तक जिंदा नहीं रहता है जबकि कहा जाता है जो सांप 100 साल  या उससे अधिक समय तक जीवित रहता है उसी के पास ये मणि  होती है और जैसे ही किसी सांप को ये मणि मिल जाती है वैसा ही वो सांप इच्छाधारी हो जाता है और इस मणि में कई दिव्य शक्तियां होती है जिससे वे साहब जो चाहे कर सकता है और अगर इस टॉपिक पर बनी फिल्मों की बात करें तो यह नाग मणि वाला सांप फिल्मों में क्या करता हुआ दिखाया जाता है कि सांप के पास मणि है और फिर भी या तो उसकी कोई मणि चुरा ले जाता है या नागिन के नाग को ही कोई मार जाता है और अब बस वही बदला लिया जाएगा और अगर कोई वैज्ञानिक सोच रखने वाला इंसान इस तरह की फिल्मों को देखेगा तो यही सोचेगा की यदि नाग मणि रखने वाले सांप भी अजीब है जब ये इच्छाधारी है तो इन को सब कुछ पता चल जाना चाहिए था कि कोई उनकी मणि चुराने आ रहा है तो  कैसे कोई  सबसे कीमती चीज़ चुरा कर ले जा सकता है?और इंसान को कौन से सांप ने बताया कि देखो हमारे पास इतनी कीमती चीज है जिसको अगर तुम भी पा लो  तो तुम भी हमारी तरह सब कुछ कर लोगे।

जबकि सांप  खुद ही मणि कि वह अपनी जान की रक्षा नहीं कर पाता और इच्छाधारी सांप भी उस मणि को खो  देता है और फिर उसको खोजता  रहता है इस प्रकार की हर दलील वैज्ञानिको को यही सोचने पर मजबूर कर देती है कि यह सब कहानी है या किसी की कल्पनाएं और बस ऐसे ही लोग इन कहानियों में मजा लेते रहते हैं। और इसी चक्कर में तो कुछ लोग भारत को सांप सपेरों का देश भी कहते है।

लेकिन वह हकीकत नहीं जानते तो उनकी भी कोई गलती नहीं है.भारत ने इस दुनिया के सबसे बड़े एक्सपेरिमेंट किए थे जिनको अफसोस हमारे ही देश के ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं कि इन सब कहानियों के अंदर बड़ा राज आज भी आपको बता दिया जाता है लेकिन जिस दिन हम इस बात को समझने की योग्यता अर्जित कर लेते हैं उस दिन बिना बताए ही सब कुछ हमारे सामने जाहिर हो जाता है।

तो चलिए जानते नागमणि के राज को जिसको आपने शायद नहीं तो सुना होगा और ना ही ऐसा आपने कभी सोचा होगा यह कहानी किसी सांप की नहीं है यह कहानी हम सभी की है और हर इंसान पर लागू होती है और आपको यह बात पूरी तरह समझ तो आज ही आ जाएगी लेकिन अगर आप इस बात का प्रूफ  मांगोगे तो इसके लिए आपको खुद भी तीसरे लेवल पर पहुंचना होगा और तीसरा लेवल मतलब पहला बॉडी का दूसरा माइंड का और तीसरा आत्मा का होता है और वो इसलिए जरूरी है होता है क्योंकि सैम लेवल का इंसान ही सेम लेवल की बात समझ सकता है।

जैसे अगर आपको चाइनीज़ भाषा आती हो तो आपके लिए इसे समझना बच्चो का खेल होगा लेकिन अगर आपको ये  भाषा आती ही ना हो तो आप तो सपने अंदाजे के घोड़े ही दौड़ आते रहोगे और आपका अंदाजा सही भी होगा इसके चांस भी लगभग 1% से भी कम होंगे या सच कहे तो 0% ही होंगे।

अब बात करें इस कहानी की तो जैसा इस कहानी में कहा जाता है कि जिसको भी यह नागमणि मिल जाए वो जो चाहे पा सकता है लेकिन यह कहानी इंसान के अंदर कि कुंडलिनी शक्ति को बताने के लिए आपको सांप के प्रतीक के रूप में बताई गई थी। इसलिए अगर इसी सांप को लंबा किया जाए तो इसका मुंह आपके माथे की उसी जगह पर दिखाया जाता है जहां पर भगवान शिव के माथे पर तीसरी आंख दिखाई गई है और वही सबसे प्रमुख आज्ञा चक्र होता है और अगर आज्ञा चक्र की खासियत  की बात करें तो इसके बारे में भी वही सब कहा जाता है जो इस नागमणि के बारे में कहा जाता है कि जिस इंसान का यह आज्ञा चक्र एक्टिवेट हो जाता है वह भी जो चाहे कर सकता है जैसे किसी को भी बिना किसी मोबाइल आदि के अपना मैसेज पहुंचा सकता है दूसरों के विचार जान सकता है जिसको टेलिपाथी कहते हैं और यहीं से शुरूआत हुई थी पुरषो के तिलक और महिलाओं में बिंदी लगाने की जिसके पीछे भी बहुत से राज़ छिपे है जिसको शायद हम लोग रोज करते हैं  मगर उसके असली मकसद को नहीं जानते हैं।

अब आपको बताती हु की यह सब बातें यह जानने वाले लोग कोडवर्ड में या कहानियों में ही क्यों ये सब कहते हैं तो ऐसा करने के पीछे उनका मकसद यही होता है कि बड़े राज को एक ऐसी कहानी के रूप में बता  देता है जिसको कहानियों के माध्यम से ही सही मगर लोग आगे तक पहुंचाते रहे क्योंकि इनको बनाने वाले लोग पागल नहीं थे इस दुनिया के सबसे तेज़ दिमाग रखने वाले लोग थे और उनको पता था कि यह बातें समझना हर किसी के बस की काम नहीं होगा और जो भी ये योग्यता  रखता होगा वे उस बात को समझ जायेगा और बाकी के लिए ये एक कहानी ही होगी।

जैसे नाग मणि के बारे में जो सबसे ज्यादा प्रसिद्ध मिथ या  कहानी है वह यही है कि जिस सांप के  पास यह मणि  होती है वह सांप रात को उस मणि की रोशनी में उतनी दूरी तक शिकार करता है या घूमता रहता है जहां तक इस मणि की रोशनी जाती है और अगर कोई इस समय इस मणि को उठाकर ले जाए तो यह सांप  वहीं पर अपना फन पटक-पटक कर मर जाता है।

अब अगर यही बात अध्यात्म की साइड से देखी जाए तो इंसान की सोच या आत्मा भी तो उसकी मणि की तरह होती है और किसी इंसान की पहुंच  कितनी दूर तक होती है वह उसकी स्प्रिचैल ग्रोथ पर ही निर्भर करती है जैसे किसी इंसान की जितनी ज्यादा ग्रोथ स्प्रिचैलिटी में होती है उतना ही ज्यादा हर चीज के पीछे छिपे सच और झूठ को जानने वाला होता है।

तो दोस्तों अब आप समझ गए आप चाहिए  की यदि आपको यह मणि चाहिए तो आपको किसी सांप को परेशान करने की जरूरत नहीं है बल्कि अपने अंदर जाइए आपको वही सब कुछ मिलेगा यही तो हर धर्म का पवित्र ग्रंथ कहता है और यही योग भी कहता था और अगर आप सही से अपने दिमाग को दिमाग से कठिन लेवल को पार कर पाए तो आपके लिए भी राज नहीं रहेगा तभी समझ पाएंगे कि ज्ञानियों ने क्यों ऐसे बेसिर पैर की कहानियां बनाई थी और कौन कौन से राज इनके अंदर छुपाये नहीं बल्कि सुरक्षित रखा गया था।

नागमणि का रहस्य:

नागमणि एक मोती ( PEARL ) के आकार की होती है ओर ये जिन साँपो में मिलती है वो इंडोनेशिया-मलेशिया में पाया जाता है ओर इसको कोबरा पर्ल ओर नेचुरल पर्ल के नाम से जाना जाता है ओर इनका आकर और डिजाईन कुछ कुछ फिश पर्ल से मिलता है.

आपने कुछ कहानियाँ भी सुनी होंगी जो इन से मिलती है की नागमणि उन सापों को मिलती है जो 1000 सालो तक जिंदा रहता है ओर उस साँपो को सब नागराज बोलते हैं वो सभी साँपो का राजा होता है अब बात आती है की नागमणि दिखती कसी है?

नागमणि देखने में बहुत छोटी से एक मोटी की तरह होती है कुछ लोगो का तो ये भी बोलना है की नागमणि वैसे होती है जैसे चावल का एक दाना ओर कुछ का कहना है की नागमणि एक बड़े मोती की तरह होती है .अगर देखा जाए तो दोनो बात कुछ हद तक एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं वो इस लिए की जेसे जेसे नागमणि की उमर बढ़ती है वैसे वैसे ही उसका आकार बढ़ता है लोगो का मानना है की नागमणि में इतनी चमक होती है के एक अँधेरे कमरे में रोशनी का प्रकाश कर देती है.

जैसे जैसे उसकी उमर बढ़ती है उसकी रोशनी भी बढ़ती चली जाती है वैसे तो नागमणि को ले कर सब की अलग अलग बाते हैं. कुछ लोग मानते है की जब स्वाती नक्षत्र में बारिश होती है तो जो बारिश की बूंदे सांप के मूह मे चली जाती है तो मणि बन जाती है और कुछ का मानना है जब स्वाती नक्षत्र में औश पड़ती है तो उस पानी से नागमणि बनती है पर सच तो कुछ और ही है अब बात आती है की अगर ये सब सच नई है तो आख़िर सच है ? क्या सच मे नागमणि होती है ?
या ये बस केवल एक कहानी है ओर अगर होती है तो सच क्या है. ये बाते हम काफ़ी टाइम पहले से सुनते आ रहे है की नागमणि होती है तो फिर आज तक हम इस बात का सच क्यों पता नही कर सके ? क्यू नहीं कोई देख पाया आज तक नागमणि? कुछ लोगो की ये भी मानते है की नाग आपनी मणि को आपने सिर पर रख कर जब ओस की बूँद को पिता है और उस समय इसको कोई आदमी देख ले तो वो आदमी कभी भी ग़रीब नई रहता. लोग ये भी बोलते है की जब कोई नाग 100 सालो तक किसी किसी को नहीं डसता है तब जा कर उसको नागमणि मिलती है पर अगर ये बात है तो फिर नाग बिने कुछ खाए ज़िंदा कैसे रहता होगा. मेने तो ये भी सुना है की जब नाग बहुत बूढ़ा हो जाते हैं की चल भी नही सकते तब उनको नागमणि मिलती है जिसकी मदद से वो अपना खाना हासिल कर पता हैं.

मणिधर नाग:

आम जनता में यह बात प्रचलित है कि कई लोगों ने ऐसे नाग देखे हैं जिसके सिर पर मणि थी। हालांकि पुराणों में मणिधर नाग के कई किस्से हैं। भगवान कृष्ण का भी इसी तरह के एक नाग से सामना हुआ था। नागमणि को भगवान शेषनाग धारण करते हैं। पुराणों और लोक कथाओं में नागमणि के किस्से आम लोगों के बीच काफी प्रचलित हैं.

नागमणि सिर्फ नागों के पास ही होती है। नाग इसे अपने पास इसलिए रखते हैं ताकि उसकी रोशनी के आसपास इकट्ठे हो गए कीड़े-मकोड़ों को वह खाता रहे। हालांकि इसके अलावा भी नागों द्वारा मणि को रखने के और भी कारण हैं.

नागमणि की विशेषताताएं:

छत्तीसगढ़ी साहित्य और लोककथाओं में नाग, नागमणि और नागकन्या की कथाएं मिलती हैं। मनुज नागमणि के माध्यम से जल में उतरते हैं। नागमणि की यह विशेषता है कि जल उसे मार्ग देता है। इसके बाद साहसी मनुज महल में प्रस्थित होकर नाग को परास्त कर नागकन्या प्राप्त करता है.

नागमणि के बारे में कहा जाता है कि यह जिसके हाथ लग जाती है, उसकी किस्मत रातोंरात बदल जाती है। नागमणि होती है या नहीं, इसके बारे में भी अलग-अलग मान्यताएं हैं। हम सबने भी मणिधारी नाग की कहानियां किताबों में पढ़ी हैं। मगर हकीकत में शायद ही किसी ने नागमणि देखी होगी।

बहुत दुर्लभ है नाममणि:

ऐसे सापों के मिलना बहुत दुर्लभ है इसल‌िए कहा जाता है मण‌िधारी नाग नहीं होते हैं। अब सच जो भी है लेक‌िन वृहत्ससंह‌िता में नागमण‌ि के बारे में कई रोचक बातें बताई गई हैं। जो इस बात को सोचने पर व‌िवश करता है क‌ि क्या वास्तव में नागमण‌ि होता है। वृहत्संह‌िता में नागमण‌ि के बारे में कई बातें कही गई हैं।

वृहत्संह‌िता और नागमण‌ि:

  1. नागमण‌ि में इतनी चमक होती है क‌ि जहां यह होती है वहां आस-पास तेज रोशनी फैल जाती है। नागमण‌ि अन्य म‌ण‌ियों से अध‌िक प्रभावशाली और अलौक‌िक होती है।नागमण‌ि मोर के कंठ के समान और अग्न‌ि के समान चमकीली द‌िखती है।
  2. यह मण‌ि ज‌िसके पास होती है उस पर व‌िष का प्रभाव नहीं होता है। यह रोग से मुक्त होते हैं।वराहम‌िह‌िर बताते हैं क‌ि ज‌िस राजा के पास यह मण‌ि होती है वह शत्रुओं पर व‌िजय प्राप्त करने वाले होते हैं
  3. इनके राज्य में समय से वर्षा होती और प्रजा खुशहाल रहती है। वराहम‌िह‌िर इस तरह की बात इसल‌िए ल‌‌िखते हैं क‌ि उन द‌िनों राजे महाराजे हुआ करते थे।

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