चित्तौड़गढ़ किला, चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

भारतीय राज्य राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित चित्तौड़गढ़ किला भारत में सबसे विशालतम किलों में से एक हैं। 7वीं से लेकर 16वीं शताब्दी तक चित्तौड़गढ़, जिसे चित्तौड़ भी कहा जाता है, राजपूतों के तहत मेवाड़ की राजधानी थी। पहले इस किले पर गुहिलोट का शासन था और बाद में सिसोदिया ने किले पर शासन किया। चित्तौड़गढ़ किला शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यहाँ आने वाले ज्यादातर टूरिस्ट्स चित्तौड़गढ़ की सैर को किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं मानते हैं। असल में छोटा-सा शहर राजस्थान की सबसे ज्यादा गाथाओं से भरा है। इस किले की एक भव्य और शानदार संरचना को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या पर्यटक यहाँ आते है।

चित्तौड़गढ़ किले का इतिहास:

देश के सबसे विशाल किलों में से एक है इस किले का निर्माण मौर्य ने 7वीं शताब्दी के दौरान किया था। अगले 834 साल तक किला मेवाड़ की राजधानी के रूप में खड़ा रहा। ऐसा कहा जाता है महाभारत काल में पांडव भाईयों में से भीम ने इस किले का निर्माण किया था। इस किले का जिक्र महान हिंदू शास्त्र महाभारत में भी किया गया है कि पांडवों के दूसरे भाई भीम ने एक बार भूमि में इतनी तेजी से मुक्का मारा की जमीन से पानी निकलने लगा जो आज यहां एक जल भंडार है, जिसे भिमला के नाम से जाना जाता है। यह जगह प्राचीन समय में जौहर प्रदर्शन करने वाले महिलाओं के लिए भी प्रसिद्ध है। राजस्थान में प्राचीन समय में जौहर एक प्रथा थी, जिसमें महिलाये अपने सम्मान को विरोधी सैनिकों और राजा से बचाने के लिए अपने पति के देहांत के बाद जलती चिता में कूद जाती थी।

इतिहास में इस किले पर प्रसिद्ध शासकों द्वारा 3 बार आक्रमण किया गया, परन्तु हर बार राजपूत शासकों ने अपनी जान की बाजी लगाकर किले को बचाया। सन 1303 में अल्लाउद्दीन खिलजी ने किले पर हमला किया, जो रानी पद्मिनी पर कब्जा करना चाहते थे, जिन्हें आश्चर्यजनक रूप से सुंदर कहा जाता था। वह उन्हें अपने साथ ले जाना चाहता था, लेकिन जब रानी ने मना कर दिया, तो अल्लाउद्दीन खिलजी ने किले पर हमला कर दिया। गुजरात के राजा बहादुर शाह ने किले पर दूसरी बार हमला किया था। मुगल सम्राट अकबर ने सन 1567 में किले पर तीसरी बार हमला किया, जो महाराणा उदय सिंह पर कब्जा करना चाहते थे। 1616 में एक मुगल सम्राट जहांगीर ने किला महाराजा अमर सिंह को वापस कर दिया, जो उस समय मेवाड़ के प्रमुख थे।

चित्तौड़ का किला चित्तौड़गढ़ का किला UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल है और यह किला भारत के राजस्थान राज्य के चित्तौड़गढ़ में स्थित है। यह किला बेहद ही विशाल है और एक पहाड़ी पर बना हुआ है। जिसकी ऊंचाई 180 मीटर है। इस किले को चित्तौड़ का किला (Chittorgarh ka Kila) भी कहा जाता है। 280 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले इस किले से बेहद ही रोचक इतिहास जुड़ा हुआ है और यह किला भारत का सबसे बड़ा किला है

यह किला गौरव का प्रतीक माना जाता है और इसे सातवीं सदी में बनाया गया था। इतिहासकारों के अनुसार इस किले को शासक चित्रांगदा मौर्य द्वारा बनाया गया था। कहा जाता है कि बप्पा रावल ने 724 ईस्वी में इस किले की स्थापना की थी और इस किले पर 834 वर्षों तक मेवार द्वारा शासन किया था।

चित्तौड़गढ़ किले के भीतर का आकर्षण:

  • विजय स्तम्भ चित्तौड़गढ़: इस विजय स्तम्भ को णा कुम्भा द्वारा महमूद शाह आई खलजी पर विजय का जश्न मनाने के लिए बनाया गया था।
  • टॉवर ऑफ फ़ेम (कीर्ति स्तम्भ): जैन व्यापारी जीजाजी राठौड़ द्वारा 22 मीटर ऊंचे टॉवर फ़ेम (कीर्ति स्तम्भ) का निर्माण किया था। यह स्तम्भ जैन के पहले और सबसे प्रसिद्ध जैन तीर्थंकर आदिनाथ को समर्पित है।
  • राणा कुम्भा पैलेस: यह किले का सबसे पुराना ढांचा है और यह महल विजय स्तंभा के पास स्थित है। उदयपुर शहर के संस्थापक महाराणा उदय सिंह का जन्म यही पर हुआ था। महल में सुरज पोल के माध्यम से प्रवेश करते है तथा इस महल में सुंदर नक्काशी और मूर्तियां हैं।
  • पद्मिनी पैलेस चित्तौड़गढ़: किले के दक्षिणी हिस्से में स्थित पद्मिनी पैलेस एक 3 मंजिला सफेद इमारत है। इसके शीर्ष पर मंडप बना है और पानी के खंभे से घिरा हुआ है।

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